Monday, March 24, 2025

सा विद्या वा विमुक्तये Education is that which liberates!!!

 



सा विद्या वा विमुक्तये Education is that which liberates!!!
Education is to impart knowledge, Knowledge is the light, the power which allows a person to open and blossom. Every child has the seed of wisdom which opens with the light, warmth and the power of knowledge and unfolds the potentials of the child to blossom and spread the fragrance of his/ her uniqueness.
Knowledge is lying all around but who can become the power house of the knowledge and apply it wisely, the one who has values.
Without the purity of the intentions (character) of the students education can't help them much.
The vessels are unclean , full of rotten thoughts , imparting knowledge in the unclean vessels makes no sense.
so educationist need to come together to clean the vessels. The era of the knowledge Economy has bygone , we are in the era of Wisdom Economy. Without purity and Truth wisdom can't work.
so imbibe values, build character, build the nation.
Innocents are coming up like shining stars like the young girl cricketer was recently in the headlines of every news channel, there are many such cases.
Dr. APJ Kalam was the most humble and purest soul.
पढ़ेगा भारत से कुछ होगा जरूर होगा परंतु सत्य पथ पर आरूढ़ होगा तो ही बढ़ेगा भारत यह तय है।
सत्यमेव जयते
श्रमेव जयते
सदी का महासंदेश सत्य से प्रेम, प्रेम से कर्म करें।
प्रसंग प्रणाम से प्रणव तक सत्य की विजय यात्रा में भाग लें
Education needs Truth in every sphere
in teachers, in curriculum, in schools, in the all aspects and factors सब ही राम समाया
जागो भारत, सही दिशा में बढ़े चलो।

मनुष्य समस्याओं से नहीं, समाधान से पीड़ित है।

 


मनुष्य समस्याओं से नहीं, समाधान से पीड़ित है।

जैसा है वैसा स्वीकार करो, समाधान ढूंढने में व्यर्थ समय बर्बाद मत करो।

सब कुछ स्वत हो रहा है, प्राकृतिक रूप से। क्या प्रकृति को कोई नियंत्रित कर सकता है। प्रकृति स्वअनुशासन से चलायमान रहती है। हम भी प्रकृतिनुसार अनुशासित हो जाए तो ना समस्या रहेगी न समाधान की आवश्यकता।

जो है सो है

आनंद तो सर्वत्र है, आनंदित रहो।

सत्यमेव जयते

श्रमेव जयते 

प्रसंग प्रणाम से प्रणव तक सत्य की विजय यात्रा में भाग लें 

रेणु वशिष्ठ 

मेरी काया मेरी वेधशाला से

25.1.2025


अपेक्षा और उपेक्षा का तमाशा

 



लोग चीज़ों से प्रेम करते रहे
और हम लोगों से,
अपेक्षा और उपेक्षा का तमाशा देखते रहे,
चीजों से प्रेम करने वालों ने लोगों को छोड़ दिया,
और हमने चीजों को।
हम चीजों को सहेजते थे, लोगों में बांटने के लिए,
लोग लोगों को बांटते रहे चीजें समेटने के लिए।
हमारा लोगों के प्रति प्रेम बढ़ता गया,
चीजों के प्रति घटता,
लोगों का प्रेम चीजों के प्रति बढ़ता गया, लोगों के प्रति घटता।
हमने चेतन से किया प्रेम, हम चैतन्य हुए,
लोगों ने जड़ से किया प्रेम , लोग जड़ हो गए।
लोग स्थूल संसार में जड़ गए, हम सूक्ष्म जगत तर गए,
कैसा ये खेल है जड़ चेतन का,
लोग जड़ होकर संसार पा गए,
हम चेतन होकर परमात्मा में छा गए।
चेतन जड़ को पकड़ता नहीं,
जड़ चेतन को पा सकता नहीं।
चकित तो चेतन होता है जानकर सत्य,
जड़ के बिना चेतन हुआ जा सकता नहीं।
यही सत्य है।
सत्यमेव जयते
सदी का महासंदेश :- सत्य से प्रेम, प्रेम से कर्म करें।
प्रसंग प्रणाम से प्रणव तक सत्य की विजय यात्रा में भाग लें।
Look beyond imperfections
Be 'PRASANG' Be Joyous
रेणु वशिष्ठ
मेरी काया मेरी वेधशाला से
4.02.2025

हम एक भौतिक शरीर नहीं हैं, हम शुद्ध चेतना है

 


सत्य है, हम एक भौतिक शरीर नहीं हैं, हम शुद्ध चेतना है। ब्रह्मांड शुद्ध चेतना है, हम उसी का रूप हैं, अहम ब्रह्मासमी तत् त्वं असि।
यथा पिंडे तथा ब्रह्माण्डे।।
प्रसंग प्रणाम से प्रणव तक सत्य की विजय यात्रा का उद्देश्य उसी शुद्ध चेतना को जन जन में जागृत करना है। युगों युगों से अंतर में सोई है शिव शक्ति , अनंत की शक्ति सभी में है, जीवन में शिव अविनाशी, जागो अपनी शिव शक्ति को जगाओ।
हर हर महादेव है, हर जन महादेव है।
सत्य को जीवन का आधार बनाए, स्वयं प्रकाशित हों, अपने महास्वरूप को पहचाने।
सदी के महासंदेश :- सत्य से प्रेम, प्रेम से कर्म करें।
सत्यमेव जयते
प्रसंग प्रणाम से प्रणव तक सत्य की विजय यात्रा में भाग लें।
Look beyond imperfections
Be 'PRASANG' Be Joyous
रेणु वशिष्ठ
मेरी काया मेरी वेधशाला से
महाशिवरात्रि 2025
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परी कथाओं में ईर्ष्या, द्वेष, जलन, मात्सर्य, क्रोध, को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जाता है। नैतिकता के नाम पर शोषण डर भय का बोलबाला होता है।
परी कथाओं के बजाय बच्चों को वीर, साहसी बालक बालिकाओं की कहानियां सुनाओ, पढ़ाओ, दिखाओ।
वीर बालक बालिकाओं की कहानियां आत्म त्याग तथा बलिदान का सजीव चित्रण करतीं है। निस्वार्थता और धैर्य, तुष्टि की पुष्टि करती हैं।
विचार करके देखिए वीर बालक, भारत, ध्रुव, प्रहलाद, लव कुश, आरुषि, पृथ्वीसिंह, शिवाजी पढ़कर आपको कैसा महसूस होता है और सिंड्रेला, रैपंजेल, हंसल ग्रेटल आदि आदि पढ़कर कैसा महसूस होता है।
बच्चों का चरित्र निर्माण करना है तो वीर बालक बालिकाओं की कहानियां सुनाओ, पढ़ाओ और दिखाओ।
Bakhal Preschool curriculum developers वीर बालक बालिकाओं की कहानियां सुनाने, पढ़ाने पर जोर देता है।

मैं खंड खंड हो बिखरती गई।

 


मैं खंड खंड हो

बिखरती गई।
मैं कहीं अखरती
कहीं बिखरती,
अखरने, बिखरने का
तांडव देखती रही।
मैं खंड खंड हो
बिखरती गई।
मैं स्वयं ही स्वयं में
विखंडित होती गई।
ना घमंड
ना उद्दंड
ना प्रचंड
न ही पाखंड,
कालखंड के फंद से
दंडित मैं
स्वयं से स्वयं में बिखरे
खंड खंड को
निरर्थक मापदंडों को
प्राणदंड देती मैं,
हो गई अखंड
एक ही मेरा
अखंड स्वरूप
सत्य से प्रेम,
प्रेम से कर्म,
सत्य, प्रेम, कर्म से
प्रवाहित प्रकाश।
अखंड प्रकाश।
प्रकाश की रज
'रेणु'
मनमोहन, मानस में
सत्य प्रसंग को प्रणाम करती रेणु
प्रणव की ओर अग्रसर रेणु।
रेणु से रेणुका भई रेणु।
सत्यमेव जयते।
सदी का महासंदेश:- सत्य से प्रेम, प्रेम से कर्म करें।
प्रसंग प्रणाम से प्रणव तक सत्य की विजय यात्रा में भाग लें।
रेणु वशिष्ठ
मेरी काया मेरी वेधशाला से
10.03.2025
(नोट:- रेणुका विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी की माता हैं। रेणु प्रसंग की माता है। संसार को असत्य विहीन करने के लिए हमें परशुराम जी जैसा बल प्राप्त होता रहे यही प्रार्थना है देवी रेणुका से)