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शिव कृपा करो,
शिव आज्ञा दो,
शिवाग्नि प्रवाहित हो।
प्रणाम 
यह तो आधुनिक विज्ञान की (fragmented)रिपोर्ट है, क्योंकि आधुनिक विज्ञान खंड खंड करके शोध कर रहा है । जबकि प्रकृति अखंड है।यदि प्रकृति के प्राकृतिक स्वरूप के आधार पर जानने का प्रयास करें जहां प्रकृति का हरेक कण अंतर्निर्भर(interdependent) है।
हममें से अधिकतर को यह मालूम नहीं होगा कि चंद्रमा फलों में रस भरता है, औषधियों में, जड़ी बूटियों में औषधि तत्व बनाने का कार्य करता है। चंद्रमा और जल तत्व का संबंध हम सभी को मालूम है जो हमें ज्वार भाटा के रूप में छोटी कक्षाओं में पढ़ाया जाता है।
रस जल ही है, जल रस ही है। पेड़ों की जड़ों से जल ऊपर जाता परंतु पेड़ की मैकेनिज्म के साथ साथ जल को ऊपर खींचने में सूर्य और चंद्रमा का भी बहुत बड़ा योगदान है। दिन में सूर्य अपनी गर्मी से जल ऊपर खींचता है और रात में चंद्रमा जल को फलों में रस में परिवर्तित करता है। नारियल के पानी को औषधीय गुण देने का कार्य चंद्रमा ने किया। हर प्रक्रिया में पांचों तत्त्व और नवग्रहों का योगदान होता ही है।
पृथ्वी पर कोई भी वनस्पति ऐसी नहीं जिसमें औषधीय गुण ना हो, यहां तक कि खरपतवार भी, जिन्हें हम जानकारी के अभाव में उखाड़कर फेंक देते हैं।
जैसे कॉलोनाइजर्स नई नई आवासीय योजनाएं लेकर आते हैं वैसे ही सृष्टिके रचयिता ने पृथ्वी पर इस संसार की रचना की। जैसे कॉलोनाइजर्स सोसाइटी में पेड़ पौधे बगीचा आदि लगाने के लिए horticuluturist की मदद लेते है,
A horticulturist is a professional who applies the art and science of plant cultivation to grow, develop, and improve fruits, vegetables, flowers, and ornamental plants. They blend scientific principles with practical gardening to increase crop yields, improve nutritional value, and enhance plant resistance to disease. वैसे ही रावण को पृथ्वी पर भेजा गया वनस्पति जगत को रचने के लिए, रावण ने एक एक वनस्पति को वेधशाला में बनाया या कहे प्रयोग करके देखा जा, जाँचा, परखा, निरीक्षण परीक्षण किया, जो भी पृथ्वी के जीव जंतुओं, प्राणियों के लिए उपयोगी वनस्पति नहीं थी उसने उसे पृथ्वी पर रहने ही नहीं दिया। कितना अद्भुत है यह सब जानना समझना। हम रावण के पुतले जलाते रहते हैं हमारे अल्प ज्ञान के कारण।
Google करके इस फैक्ट को वेरिफाई करने की कोशिश करेंगे तो शायद आपको उत्तर नहीं मिलेगा क्योंकि गूगल पर आधी अधूरी जानकारी उपलब्ध रहती है। यदि हम इधर इस विषय पर चर्चा कर रहें हैं तो AI सतर्क हो जाएगा और जानकारी इक्कठी करने लगेगा। परंतु ये सब पढ़ने के बाद कितने लोग अपनी उत्सुकता को बढ़ाएंगे इस जानकारी के सत्य को अपने सत्य से उजागर करने का प्रयास करेंगे।
हम रावण का धन्यवाद करें। 
हम सृष्टि के रचयिता से अनुगृहीत रहें। हमें अपनी लीला का अंश बनाया।
अपने role को पूर्ण भाव से निभायें। आप सूर्य का तेज है या चंद्रमा का रस आपका हर हाव भाव कुछ बना रहा है, कुछ बिगाड़ रहा है, फिर से कुछ बना रहा है। बीज से फल और फल में फिर से बीज। बनते बिगड़ते, बिगड़ते बनते रहो।
सत्यम शिवम सुंदरम तभी मिलेगा।
बस एक बात का ध्यान रखें, सदी के महासंदेश सत्य से प्रेम, प्रेम से कर्म करें।
प्रसंग प्रणाम से प्रणव तक सत्य की विजय यात्रा में भाग लें।
Look beyond imperfections
Be 'PRASANG' Be Joyous
रेणु वशिष्ठ
मेरी काया मेरी वेधशाला से
बुधवार 10 जून 2026
प्रातः 7.32
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