प्रणाम,
उच्चारण (सही तरीके से बोलना) न केवल भाषा को स्पष्ट और समझने योग्य बनाता है, बल्कि यह आंतरिक ऊर्जा और उत्तम न्यूरल नेटवर्क को उत्तेजित कर कंपन स्पंदन पैदा करता है जो तरंग बन ब्रह्माण्डीय ऊर्जाओं के साथ तारतम्य स्थापित करता है।
जितना स्पष्ट उच्चारण होगा तरंग उतनी ही प्रभावशाली होगी और उतना ही प्रभावशाली व्यक्तित्व होगा।
संगीत में यदि एक स्वर भी ऊपर नीचे हो जाए तो बेसुरा हो जाता है उसी प्रकार बोलते समय यदि एक अक्षर का उच्चारण भी स्पष्ट न हो तो वार्तालाप या संवाद में अधिक अंतर नहीं पड़ता परंतु तरंग में अंतर पड़ जाता है। आपकी बात प्रभावशाली नहीं रहती है। भाव और अर्थ की स्पष्टता: सही और स्पष्ट उच्चारण से संवाद बेहतर होता है और अर्थ का अनर्थ होने से बचता है। यह श्रोता को वक्ता के संदेश से सीधे जोड़ता है।
वेदों और शास्त्रों में मंत्रों के सटीक उच्चारण पर बहुत जोर दिया गया है, क्योंकि इनकी ध्वनि तरंगें वातावरण और साधक के भीतर एक दिव्य आभामंडल तैयार करती हैं।
हम उस युग में जी रहे हैं जहां हमारी वाणी, भाषा , शब्द, अक्षर सभी मंत्र समान कार्य कर रही हैं। यदि हमारे सामान्य बोलचाल की भाषा में भी उच्चारण स्पष्ट हो तो बिना प्रयास के सहजता से पूर्ण व्यक्तित्व विकास संभव है।
उच्चारण की महिमा को जानते समझते हुए प्रसंग वशिष्ठ चेरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से बाखल प्री स्कूल करिकुलम रिसर्चर्स प्राइवेट लिमिटेड ऑनलाइन कक्षा आयोजित करने जा रहा है।
सिलेबस रहेगा : ध्वनि, अक्षर, शब्द ।
कक्षा सभी आयु वर्ग के लिये उपयोगी है।
आयोजक
रेणु वशिष्ठ
मैनेजिंग ट्रस्टी प्रसंग वशिष्ठ चेरिटेबल ट्रस्ट
निदेशक बाखल प्री स्कूल करिकुलम रिसर्चर्स प्राइवेट लिमिटेड
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