प्रणाम,
आज का प्रसंग,
ये केचिद्दुःखिता लोके सर्वे ते स्वसुखेच्छया।
ये केचित्सुखिता लोके सर्वे तेऽन्यसुखेच्छया॥ शास्त्रपिटक॥
इस संसारमें जो कोई भी अपने सुखकी इच्छासे कर्म करते हैं, वही दुखी हैं और जो कोई भी दूसरोंके सुखकी इच्छासे कर्म करते हैं, वे ही सुखी हैं।
सर्वे भवन्तु सुखिन, सर्वे संतु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चित दुःखभाग भवेत्। 



आस्था, विश्वास, सत्यनिष्ठ होकर उपरोक्त्त श्लोक भी बारम्बार बोल लें तो सुख अवश्य मिलता है। शब्दों की महिमा अपरंपार है।
करके देखें!
सदी का महासंदेश सत्य से प्रेम, प्रेम से कर्म करें।
प्रसंग प्रणाम से प्रणव तक सत्य की विजय यात्रा में भाग लें।
Look beyond imperfections
Be 'PRASANG' Be Joyous
रेणु वशिष्ठ
मेरी काया मेरी वेधशाला से
4.1.2026
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