शिव कृपा करो
शिव आज्ञा दो
श्रीवाग्नि प्रवाहित होने।
प्रणाम,
दिव्यास्त्र तो बन रहे है परंतु बच्चों की दिव्यता का पोषण नहीं हो रहा?
दिव्यता के पोषण हेतु शिक्षा नहीं विद्या देनी चाहिए। बच्चों को साक्षर नहीं सरस बनाना है।
ज्ञान का विज्ञान जाने बिना बच्चों की दिव्यता उजागर नहीं हो सकती। दिव्यता बुद्धि में नहीं विवेक के केंद्र बिंदु में होती है। सुनने, बोलने, लिखने, पढ़ने में बिंदु को प्रकाशित होना चाहिए।
बिंदु के केंद्र में पहुंचने के लिए केंद्रित होने की आवश्यकता है।
अनुशासन के बिना केंद्रित होना संभव नहीं। अनुशासन का अर्थ ही अपने अणु अणु पर शासन करना है। यदि बच्चे अपने केंद्र को नहीं थाम पाए तो उनकी दिव्यता व्यर्थ व्यय हो जाती है।
दिव्य होने के लिए सदी के महासंदेश सत्य से प्रेम, प्रेम से कर्म करें।
प्रसंग प्रणाम से प्रणव तक सत्य की विजय यात्रा में भाग लें।
Look beyond imperfections
Be 'PRASANG' Be Joyous
रेणु वशिष्ठ
मेरी काया मेरी वेधशाला से
9फरवरी 2026
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