संहार और सृजन का कारोबार
है प्रकृति।
प्रकृति का सूक्ष्मतम अंश,
प्रकृति की रज,
चेतन रेणु,
ब्रह्मांड का अणु
परमाणु
रेणु,
जीवन का आधार कण
रेणु
मूल प्रकृति का
सौम्य
कोमल
आधार
रेणु।
सत्य का सूक्ष्मतम
कण
रेणु ।
सत्यमयी
प्रेममयी
कर्ममयी
रेणु
सत्य प्रसंग को
हर जन
हर मन
कण कण में
प्रणाम करती
रेणु।
सत्य का आधार
कण
बीज
रेणु।
सूक्ष्म हो
चेतन हुई,
जीवन की हर
गर्जन
घर्षण से
खंड खंड हुई
रेणु।
डरी
सहमी
कुमलाई
झुलसाई
रेणु।
प्रसंगवश
चेतन हो
डर से निडर
भय से निर्भय
मन ही मन
मंद मंद मुसकाई
रेणु।
सत्य से सत्य में
अडिग
सूक्ष्म से विराट
अंधकार से प्रकाश में
विचरण करती
रेणु।
सृजन से सृजित
रेणु
आपदा को अवसर में बदलती
रेणु
यही सत्य है।
सदी का महासंदेश सत्य से प्रेम, प्रेम से कर्म करें।
प्रसंग प्रणाम से प्रणव तक सत्य की विजय यात्रा में भाग लें।
Look beyond imperfections
Be 'PRASANG' Be Joyous
रेणु वशिष्ठ
मेरी काया मेरी वेधशाला से
11.10.2025
प्रातः 8.06


No comments:
Post a Comment