Tuesday, November 3, 2026

कदम से कदम को मिला के चलो

 




कदम से कदम को मिला के चलो
सभी को गले से लगा के चलो
हर इक कदम अपनी चा हत बने
कदम दर कदम मिलके ताकत बने
कदम दर कदम हम तो आगे बढ़े।


कदमों का जादुई सफर और एकता की ताकत

एक सुंदर और हरे-भरे गाँव में 'मधुबन' नाम का एक प्यारा सा स्कूल था। वहाँ कई सारे नन्हे-मुन्ने बच्चे पढ़ते थे। उन बच्चों में एक बात बहुत खास थी—वे कभी अकेले नहीं चलते थे। वे हमेशा एक-दूसरे का हाथ थामकर, "कदम से कदम को मिला के चलो" गाते हुए स्कूल आते और खेलते थे।

एक दिन स्कूल के खेल के मैदान में एक मजेदार प्रतियोगिता हुई। टीचर ने बच्चों से कहा, "आज तुम सबको मिलकर एक लंबी छलांग लगानी है और मैदान के दूसरे छोर तक पहुँचना है।"

शुरुआत में सब बच्चे अलग-अलग भागने लगे, जिससे वे बार-बार लड़खड़ा कर गिर जाते। तब एक समझदार बच्ची आगे आई और बोली, "ऐसे अकेले भागने से हम थक जाएँगे और जीत नहीं पाएंगे। हमें तो मिलकर चलना होगा!"

फिर क्या था! सब बच्चों ने एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखा, सभी को गले से लगा के चलो की तर्ज पर आपस में प्यार से जुड़े और एक साथ लाइन बनाई।

अब हर एक कदम उनकी चाहत बन गया था। जब वे सब एक साथ तालमेल बिठाकर आगे बढ़ने लगे, तो वह कदम-दर-कदम मिलकर एक बहुत बड़ी ताकत बन गया। किसी को भी अब अकेलेपन या हार का डर नहीं था, क्योंकि वे सब एक साथ, कदम दर कदम आगे बढ़ रहे थे।

उन्होंने हँसते-गाते हुए वह खेल भी जीत लिया और यह सीख लिया कि जब हम सब मिलकर, एक-दूसरे का साथ देते हुए आगे बढ़ते हैं, तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती!




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