Friday, April 10, 2020

सुखद प्रभात है
बाहर बहुत दिखावे करते रहते है आदर्श के,
भीतर लोभ मोह मद बनते है, करें अपकर्श के।
कथनी और करनी में होता क्या ना कभी उत्पात है।
क्या कठोर अपने प्रति, औरो के प्रति रहे उदार हम।
कर भी पाए क्या अपनी से प्रेमभरा व्यवहार हम।
किया उचित के निर्धारण का क्या हमने अभ्यास है।
कर भी लिया किन्तु क्या उस पर किया अडिग विश्वास है।
सबल पांव ही टिकते है, जब आता झंझवत है।
शैली उच्चतर हो, तो फिर निश्चित सुखद प्रभात है।

आना और जाना

आना और जाना
आना और जाना जीवन की प्रक्रिया है। हर क्षण कितने ही विचार पैदा होते हैं और चले जाते हैं। विचारों का आना जाना जीवन प्रक्रिया का हिस्सा है।क्या समुद्र में कोई लहर कभी रुकती है? लहरों का आना जाना , उठना गिरना प्रक्रिया है। विचार भी आते जाते हैं। उठते गिरते है। प्रतिक्रिया और अनुक्रिया आती जाती रहती है।
कुछ भी चीज ठहरी हुई नहीं है। हमे लगता है हम रुके हुए है परन्तु ऐसा नहीं है हर शन परिवर्तनशील है। हर शन उतार चढ़ाव वाला है।
हम किसी एक चीज को पकड़कर बैठने की कोशिश क्यों करते है?
हम किसी भी चीज के प्रति गंभीर क्यों ही जाते है?
शायद बहुत नकारात्मकता होती है  इसलिए हम बहुत गंभीर हो जाते हैं।
यदि कुछ ऐसा होता भी है जो हमारे जीवन में समृद्धि लाए (शुरुआत होती है तो हम उस समृद्धि की (अवसर को पकड़ना) शुरुआत को पकड़ने के बजाय बहुत सारे प्रश्न उसके आगे लगा देते है जिनका उत्तर  ना में होता है। और उस अवसर को हाथ से जाने देते हैं। क्योंकि हम कोई भी चीज पूर्णता के साथ चाहते है। हमे चाहिए तो पूरा फायदा चाहिए नहीं तो जो चल रहा है ठीक है।
यदि देखा जाए तो बूंद बूंद से घड़ा भरता है। ईंट ईंट से मकान बनता है। एक एक सीढ़ी चढ़ कर है मंजिल पर पहुंचा जा सकता है। बूंद बूंद जुड़कर ही बादल बनता है, सागर भिवतो बूंद बूंद से बनता है।
एक साथ पूर्ण लाभ की चाहत में हम हीरे को छोड़ पत्थर पसंद करके बैठे रहते हैं। फिर किस्मत या भगवान् को  कोसते है।
दुख की घड़ी अधिकतर जीवन में कोई ना कोई अवसर लेकर आती है।
यदि कभी से भी कोई दुख दर्द आपको मिल रहा है उस घड़ी के अहसानमंद रहिए। दुख दर्द, परेशानी का समय जीवन में परिवर्तन लाने का एक अवसर होता है। निर्भर आप पर करता है कि उस परिवर्तन को आप सकारात्मक लेते है या नकारात्मक।
कभी कभी अच्छे परिवर्तन के लिए हमे कोशिश करनी होती है।
एक शिपकर जिस प्रकार पत्थर में से अवांछनीय भाग छांट कर मूर्ति को रूप देता है उसी प्रकार जीवन में दुख दर्द सभी अवांछनीय तत्वों को हटाने में हमारी मदद करते हैं और हमे हमारे सत्य स्वरूप से मिलवाते है।
जीवन में कभी कभी ऐसे शन भी आते है जब हमें लगता है कि हम बिल्कुल अकेले पड़ गए हैं। इस अनुभव के लिए हमे प्रसन्न होना चाहिए क्योंकि ये वो क्षण होते है जब हमें अपनी शक्तियों को जानने समझने का मौका मिलता है।
हम अकेलेपन से घबराते है। कोई भी अकेला नहीं रहना चाहता है। अकेला होना जीवन में बहुत सी उच्च संभावनाओं का स्त्रोत होता है।
यदि जीवन में सिर्फ समय को व्यतीत करना है तो दो तीन चार आठ की जरूरत होती है।
हमे अकेलेपन को एकांत में परिवर्तित करने के लिए बहुत धैर्य की आवश्यकता होती है।
यह दुनिया बहुत विचित्र है। यह हमे हर समय व्यस्त रखती है। और हमे हमी से दूर करती है।

विचार तरंगे

विचार तरंगे
सशक्त विचार, घटनाएं कभी सम्पत नहीं होती वर्ण अचेतन/अविज्ञातब्रह्मंडिय पार्टी में समाई रहती है। सहधर्मी विचार आपस में मिलते, अनुकूल का चुनाव करते तथा घनीभूत होते रहते है।
जिन विचारो की  आवृति जितनी  अधिक होती है, वे उतने ही समर्थ व सक्षम बनते जाते है। रटते रटते विचार मंत्र का रूप ले लेते है। उनकी तरंगे अकाशिक रेकॉर्ड्स में उपस्थित रहती है और समय समय पर अपनी प्रेरणाएं संप्रेषित करती रहती है।वे तरंगे कई प्रकार की होती है और सूक्ष्म वातावरण में प्रवाहित होती रहती है। उनका सामर्थ्य कभी भी क्षय नहीं होता।
विचार तरंगों को अभ्यास द्वारा सघन व केंद्रित किया जा सकता है। केंद्रित की गई तरंगे विलक्षणता का परिचय देती है। धारणा, ध्यान, साधना, उपासना आदि के द्वारा इन्हें विकसित किया जा सकता है।
मनुष्य अपनी विचार संपदा को सशक्त बनाकर अपने समीपवर्ती वातावरण को अनुकूल बनाने में समर्थ हो सकता है।
ग्रह, नक्षत्र एवम् अदृश्य शक्तियों के कुप्रभाव को रोकने के लिए व्यक्तिगत भौतिक प्रयास में सामूहिक आध्यात्मिक पुरुषार्थ एवम् लोक मंगल की विचार,। भावनाएं अधिक सफल एवम् समर्थ होती है।
उत्तम विचार, उत्तम कर्म, उत्तम व्यवहार।
आज, कल और हमेशा।

सोने का अंडा
समझिए कि एक अंडे में सोना है। हर समय को एक अंडा मानिए। सोचिए कि हर समस्या में एक स्वर्णिम अवसर छुपा रहता है।जब भी आप किसी भी समस्या का सामना करें हिम्मत ना हारे, समस्या को समझने का प्रयास करें व उसमे छुपे हुए स्वर्णिम अवसर का धैर्य से इंतजार करें। यह अभिवृति आप में सृजनात्मक गुन पैदा करेगा।
किसी भी समस्या को sakratmak रूप से लेने के कई और भी तरीके है।
जैसे
जब कोई समस्या आपके सामने आती है उससे उबरने के कोई और तरीके सोचिए। लिख डालिए। उनमें से पांच उत्तम तरीके चुन लीजिए।
समस्या को समस्या न समझे, एक अवसर जाने अपने जीवन उदेश्य की ओर अग्रसर होने का।
ऐसी शब्दावली का उपयोग करें जो आपके विचारो, व्यवहार और कार्यों को रूपांतरित कर सके। अपनी भाषा को सशक्त बनाएं।
विभिन्न दृषटिकोणों के अंतर को समझे। आपको समस्या के समाधान में मदद करेंगे।
जब आप धीरे धीरे समस्या के समाधान की ओर बढ़ने लगेंगे तो आपको लगेगा जो हुआ अच्छा हुआ। समस्या रूपी अंडे से सोने सा समाधान निकलेगा ही।

Thursday, April 9, 2020

जब हम अपने केंद्र को शुद्ध करने में सक्षम होते है तो हमारा तंत्र उच्च आवृत्तियों को प्राप्त कर पाता है।
हम सृजनात्मकता ही जाते है।आप उमंग से भर जाते ही।आप आनंद मार्ग पर चलने लगते ही। हम बहुत सारी आवाज़ों को सुनते है।
मधुमक्खी की आवक सुनकर कर्नाटक संगीत महारथी त्याग रहने एक नया राग इज़ाद कर लिया।
सांप और सरस की लड़ाई देखकर मार्शल आर्ट की उत्पत्ति हो है।
सब को पेड़ से गिरते देखकर गुरुत्वाकर्षण की खोज हो गई। बहुत समय से ऐसा होते हुए लोग देख रहे होंगे परन्तु उसको अन्य। रूप में नहीं देख पाए।
जब हम अशुद्धियों से भरे होते है तो हमारे देखने समझने का नजरिया बहुत असमंजसतापूर्ण होता है। उसमे स्पष्टता नहीं होती है

जैसे जब पानी में अस्थिरता होती हैतो दृश्य स्पष्ट नहीं होता है।जैसे ही पानी में स्थिरता आती है तो दृश्य साफ हो जाता है।ठीक उसी प्रकार जब अंतर में अस्थिरता होती है तो सोचने समझने कि क्षमता कम हो जाती है। उथल पुथल मशी रहती है।
विचारों की अस्पष्टता घेरे रहती है।इस अवस्था में सृजनात्मक विचारों के बारे में सोच भी नहीं सकते।अशांति और असफलता का साम्राज्य छाने लगत है।

 दुनिया को खूबसूरत या बदसूरत हमारी सोच बनती है। जब हम स्वधर्म को पहचानने लगत है तो आरोप प्रत्यारोप समाप्त हो जाते है। ना तो आप दुनिया को दोषी ठहराएंगे ना किस्मत को। जो कुछ जीवन में घटित होता जा रहा है उसे स्वीकार करने की क्षमता का आप में विकास होगा।सहज रूप में सभी स्वीकार्य होगा। जब सहजता जीवन में आने लगेगी तो नकारात्मकता का स्थान सकारात्मकता ले लेगी। धीरे धीरे आप सकारात्मक सोच वाले हो जाएंगे और सफलता , खुशियों के द्वार एक के बाद एक आपके जीवन में खुलते जाएंगे।
जिस प्रकार हम कही भी हो हमे अपने घर पहुंचने की चाह रहती है। घर पहुंचकर हम एकदम रिलैक्स हो जाते है। एक सुरक्षा की भावना हममें आ जाती है। सुकून आ जाता है। एक ठहराव आ जाता है। उसी प्रकार जब हम अंतर्मन को छूने की कोशिश करते है या कंही बाहर भी हम अपने साथ में होते है हमे एक स्थिरता महसूस होती है। एक खुशी मिलती है।
में के घोड़े को लगाम देकर अपने में स्थित कर उस क्षण को महसूस करने का प्रयत्न करे। आप अपने में को अपने पर केंद्रित करिए।
हमे मध्य मार्ग अपनाना है। अतिरांजीजतता को नजरंदाज करे। अपने अंतरतम के गहरे केंद्र में स्थित होने का प्रयास करे। कुलमिलाकर अपना सत्य धर्म खोज कर स्थित हों। हर पल हर क्षण जैसा है वैसा स्वीकार करें। इस प्रकार अभ्यास करने से मन द्वारा उत्पन्न नकारात्मकता समाप्त होगी।